What is Poshan Abhiyan पोषण अभियान 2.0 क्या है

सरकारी योजना

 पोषण अभियान क्या है

पोषण अभियान (समग्र पोषण के लिए प्रधानमंत्री की व्यापक योजना) देश में कुपोषण को कम करने के उद्देश्य से 2018 में शुरू किया गया था। कुपोषण में कमी के लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी लाने के लिए इसे अब मिशन पोषण 2.0 के रूप में और मजबूत किया जा रहा है।

पोषण 2.0 का लक्ष्य पूरे भारत में 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति में बदलाव लाना है। यह सुनिश्चित करेगा कि वे पर्याप्त कैलोरी का उपभोग करें, साथ ही अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए आयरन, विटामिन ए, विटामिन बी12 आदि जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्त खपत के लिए आहार विविधता को भी बढ़ावा देंगे।

इसमें गर्भधारण के बाद से जीवन के पहले 1000 दिनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो एक बच्चे के जीवन में उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे स्वस्थ बाल देखभाल प्रथाओं और बच्चों और उनकी माताओं के लिए स्वस्थ, विविध और स्थानीय रूप से उपलब्ध आहार के माध्यम से अपनी पूर्ण शारीरिक और संज्ञानात्मक क्षमता तक बढ़ें।

यह मिशन तीन स्तंभों पर बनाया गया है:

  1. सुशासन
  2. सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व पर जोर देने के साथ मंत्रालयों और स्थानीय सरकारी निकायों में अभिसरण
  3. पदाधिकारियों का क्षमता निर्माण

मिशन को इसके लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया ह

  1. स्वस्थ आहार और शिशु देखभाल प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना
  2. पोषक-उद्यानों और खाद्य सुदृढ़ीकरण के माध्यम से स्वस्थ और विविध आहार तक पहुंच प्रदान करना
  3. पोषण आवश्यकताओं में अंतर को पूरा करने के लिए गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों को स्थानीय आंगनबाड़ियों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण प्रदान करना। गुणवत्ता और वैज्ञानिक मानदंडों को पूरा करने के लिए इस पूरक पोषण का परीक्षण किया जाएगा
  4. गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का समय पर उपचार सुनिश्चित करना

सभी नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से देश में कुपोषण से लड़ा जा सकता है। इस इरादे से, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय MyGov के सहयोग से मिशन पोषण 2.0 के लॉन्च को चिह्नित करने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों के नागरिकों को एक “टैगलाइन” के साथ एक “लोगो” डिजाइन करने के लिए आमंत्रित करता है।विजेता प्रविष्टि को 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा (केवल एक लाख रुपये)

 

चर्चा में क्यों है 

हाल ही में आयुष मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से महिला और बाल विकास मंत्रालय (MWCD) के विभिन्न हस्तक्षेपों के तहत लगभग 4.37 लाख आँगनवाड़ी केंद्रों ने पोषण वाटिका की स्थापना की गई है।

  1. वर्तमान में जारी पोषण माह 2022 के तहत देश भर में बैकयार्ड पोल्ट्री/मत्स्य पालन इकाइयों के साथ पोषण वाटिका की स्थापना के लिये बड़े पैमाने पर कई कार्यकलाप किये जा रहे हैं।
  2. इसके अतिरिक्त, अब तक 6 राज्यों के कुछ चयनित ज़िलों में 1.10 लाख औषधीय पौधे भी लगाए जा चुके हैं।

पोषण माह  कब से चालू होता है 

  1. पोषण अभियान के अंतर्गत हर साल सितंबर के महीने में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है
  2. इसमें प्रसवपूर्व देखभाल, इष्टतम स्तनपान, एनीमिया, विकास निगरानी, लड़कियों की शिक्षा, आहार, शादी की सही उम्र, स्वच्छता और स्वस्थ भोजन (खाद्य पोषण) पर केंद्रित एक महीने की गतिविधियाँ शामिल है।
  3. ये गतिविधियाँ सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन संचार (Social and Behavioural Change Communication- SBCC) पर ध्यान केंद्रित करती हैं तथा जन आंदोलन दिशा-निर्देशों पर आधारित होती हैं।

पोषण वाटिका क्या है 

  1. पोषण वाटिका का अर्थ है भूमि का वह छोटा टुकड़ा जहाँ घर के लोग सब्जियाँ उगाते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परिवार में सभी विशेष रूप से बच्चे और महिलाएँ कुपोषण का शिकार न हों।
  2. इसका मुख्य उद्देश्य जैविक रूप से घरेलू सब्जियों और फलों के माध्यम से पोषण की आपूर्ति करना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे।
  3. आँगनवाड़ियों, स्कूल परिसरों और ग्राम पंचायतों में उपलब्ध स्थान में सभी हितधारकों द्वारा पोषण वाटिका के लिये वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा।

पोषण अभियान

  1. 8 मार्च, 2018 को सरकार द्वारा पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) शुरू किया गया था।
  2. इसका उद्देश्य स्टंटिंग, अल्पपोषण, एनीमिया (छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोर लड़कियों के बीच) तथा जन्म के समय वजन में कमी को क्रमशः 2%, 2%, 3% और 2% प्रतिवर्ष कम करना है।
  3. इस मिशन का लक्ष्य 2022 तक 0-6 आयु वर्ग के बच्चों में स्टंटिंग को 38.4% से घटाकर 25% करना है।
  4. पोषण अभियान का उद्देश्य प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा सेवा वितरण और हस्तक्षेप, अभिसरण के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन तथा विभिन्न निगरानी मापदंडों में प्राप्त किये जाने वाले विशिष्ट लक्ष्यों को सुनिश्चित करना है।
  5. इस अभियान के तहत ज़िले के अधिकारियों के साथ समन्वय करने और देश भर में अभियान के तेज़ और कुशल निष्पादन के लिये प्रत्येक ज़िले में स्वस्थ भारत प्रेरक तैनात किये जाएँगे। स्वस्थ भारत प्रेरक अभियान के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के लिये उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेंगे।

पोषण 2.0 क्या है 

 संचालन में तालमेल बनाने और पोषण सेवा तंत्र में एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने के लिये सरकार ने पोषण 2.0 मिशन के तहत पूरक पोषण कार्यक्रम एवं पोषण अभियान जैसे समान उद्देश्यों के साथ विभिन्न कार्यक्रमों को समायोजित किया है।

    1. अभिसरण:⇒ यह अभियान, MWCD की सभी पोषण संबंधी योजनाओं की लक्षित आबादी पर अभिसरण सुनिश्चित करना है। अभियान विभिन्न कार्यक्रमों के अभिसरण को भी सुनिश्चित करेगा।
    2. एकीकृत बाल विकास सेवाएँ:⇒सामान्य अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर (ICDS-CAS): पोषण की स्थिति की सॉफ्टवेयर आधारित निगरानी की जाएगी।
    3. व्यवहार परिवर्तन:⇒ अभियान को जन आंदोलन के रूप में चलाया जाएगा जहाँ लोगों की सामूहिक भागीदारी वांछित है। जागरूकता को बढ़ावा देने और मुद्दों को संबोधित करने के लिये प्रत्येक माह समुदाय आधारित कार्यक्रम का आयोजन होगा।
    4. प्रोत्साहन:⇒ अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्त्ताओ को उनके प्रदर्शन हेतु प्रोत्साहन दिया जाएगा।
    5. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण:⇒ 21 विषयगत मॉड्यूल प्रशिक्षण के लिये वृद्धिशील शिक्षण दृष्टिकोण अपनाया जाएगा तथा अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्त्ताओं को प्रमुख प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।
    6. शिकायत निवारण:⇒ किसी भी समस्या के समाधान तक आसान पहुँच के लिये एक कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा।

 पोषण अभियान की आवश्यकता क्यों परा ?

  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey-NFHS)-5 के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों में मामूली सुधार के बावजूद, अस्वीकार्य रूप स्टंटिंग (बौनापन) के मामले बड़ी संख्या में देखे गए हैं।
  • वर्ष 2019-21 में पाँच वर्ष से कम उम्र के 35.5% बच्चे स्टंटिंग से पीड़ित थे और 32.1% कम वजन के थे। 
  • वैश्विक पोषण रिपोर्ट-2021
    1. वैश्विक पोषण रिपोर्ट (Global Nutrition Report-GNR), 2021 के अनुसार, भारत ने एनीमिया और चाइल्डहुड वेस्टिंग (Childhood Wasting) पर कोई प्रगति नहीं की है।
      1. भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के 17% से अधिक बच्चे चाइल्डहुड वेस्टिंग के कारण प्रभावित होते हैं।
    2. NFHS 2019-21 के आँकड़ों से पता चलता है कि एनीमिया में सबसे अधिक वृद्धि 6-59 माह की उम्र के बच्चों में हुई जो NFHS-4 (2015-16) के 58.6% से बढ़कर, NFHS-5 में 67.1% हो गई है।

राजस्थान महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ANM &GNM भर्ती 2023, Rajastan RSSB Female Health Worker 3646 Post

पोषण ट्रैकर लॉन्च करने का उद्देश्य क्या है?

पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्र (एडब्ल्यूसी), आंगनवाड़ी कर्मचारी (एडब्ल्यूडब्ल्यू) की सेवा प्रदान करने वाली गतिविधियों और गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के लिए पूर्ण लाभार्थी प्रबंधन की गतिविधियों का 360 डिग्री दृश्य प्रदान करना है। प्रस्तावित प्रणाली को सभी एडब्ल्यूसी, एडब्ल्यू डब्ल्यू और लाभार्थियों को परिभाषित संकेतक पर वास्तविक समय की निगरानी और समझना सक्षम करना चाहिए।

क्या कोई लाभार्थी आवेदन के उपयोग द्वारा सीधे पंजीकरण कर सकता है।

वर्तमान में, एक लाभार्थी आँगनवाड़ी कार्यकर्ता की सहायता से पंजीकरण करा सकता है

टेक होम राशन के लिए कौन पात्र है?

गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, 6 महीने से 3 वर्ष तक के बच्चे और किशोर (पंचायत राज पदाधिकारी भर्ती 2023, 266 पद { बिहार}) लड़किया

मैं टेक होम राशन के बारे में कहाँ पूछ सकता हूँ?

कृपया, अपने संबंधित आँगनवाड़ी कार्यकर्ता सेसंपर्क करें।

लाभार्थी की पात्रता क्या है?

एक लाभार्थी महीने में कम से कम 21 दिनों के लिए THR के लिए पात्र है।

क्या कोई लाभार्थी अपना आँगनवाड़ी केंद्र परिवर्तित कर सकता है?

एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता अपनी आधार संख्या के आधार पर किसी लाभार्थी को एक आँगनवाड़ी केंद्र से दूसरे आँगनवाड़ी केंद्र में स्थानांतरित करने के लिए ‘माइग्रेट लाभार्थी’ के विकल्प का उपयोग कर सकता है |

लाभार्थी कौन कैन  है ?

यहाँ लाभार्थियों की 6 श्रेणियाँ हैं

  1. प्रेग्नेंट औरत
  2.  स्तनपान कराने वाली माता
  3.  0-6 माह तक के बच्चे
  4.  6 माह 3 वर्ष तक के बच्चे 
  5. 6 वर्ष – 3 वर्ष तक के बच्चे
  6. किशोरी लड़कियाँ 
  7. बालिकाए

 

 

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